| What Is Code of conduct |
What Is Code of conduct आचार संहिता क्या है और इससे जुड़े नियम क्या हैं ?
What Is Code Of Conduct In Hindi (आचार संहिता क्या है और इसे क्यों लगाया जाता है) Election Commission of India Model Code of Conduct in Hindi : आदर्श चुनाव आचार संहिता असल में चुनाव आयोग की ओर से राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए जारी दस्तावेज है! राजनैतिक दलों की सहमति से बनाए गए नियमों के समूह को ही आदर्श आचार संहिता का नाम दिया गया है निर्वाचन चुनाव आयोग द्वारा इसे जारी किया जाता है !
देश के अन्दर चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है जो की चुनाव की घोषणा से लेकर मतगणना के बाद नतीजों की घोषणा होने के बाद समाप्त हो जाती हैं ! आदर्श आचार संहिता के तहत चुनाव आयोग द्वारा कुछ पाबंदियां लगाई जाती हैं जिनका पालन करना देश के प्रत्येक राजनैतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं के लिए जरुरी होता है जिससे कि चुनाव से पहले और रिजल्ट डिक्लेयर हो जाने तक देश में शान्ति और सुरक्षा का वातावरण बना रह सके और चुनाव निष्पक्ष ढंग से कराया जा सके !
What Is Code Of Conduct | आदर्श आचार संहिता क्या है?
देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम बनाता है। चुनाव आयोग के इन्हीं नियमों को आचार संहिता कहते हैं। लोकसभा/विधानसभा चुनाव के दौरान इन नियमों का पालन करना सरकार, नेता और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी होती है।
When Code Of Conduct Is In Power आचार संहिता कब से लागू होती है?
आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है। देश में लोकसभा के चुनाव हर पांच साल पर होते हैं। अलग-अलग राज्यों की विधानसभा के चुनाव अलग-अलग समय पर होते रहते हैं। चुनाव आयोग के चुनाव कार्यक्रमों का एलान करते ही आचार संहिता लागू हो जाती है।
आचार संहिता कब तक लगी रहेगी?
आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक लागू रहती है। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता देश में लगती है और वोटों की गिनती होने तक जारी रहती है।
Rules Of Code Of Conduct आचार संहिता के मुख्य नियम क्या हैं?
आचार संहिता के नियम कानून व प्रावधान Code of Conduct Rules: आचार संहिता लागू होने के बाद सार्वजनिक धन के प्रयोग पर रोक लगा दी जाती है, जिससे किसी राजनीतिक दल या राजनेता को चुनावी लाभ न प्राप्त हो सके !
चुनाव प्रचार के लिए सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का प्रयोग नहीं किया जा सकता है !
मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए किसी भी तरह की सरकारी घोषणाओं, लोकार्पण, शिलान्यास पर रोक लगा दी जाती है !
पुलिस की अनुमति के बिना कोई भी राजनीतिक रैली नहीं की जा सकती है !
धर्म के नाम पर वोट की मांग नहीं की जा सकती है !
इस दौरान सरकारी खर्च से किसी भी प्रकार का ऐसा आयोजन नहीं किया जाता है जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ प्राप्त हो सके !राजनीतिक दलों के आचरण और क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक (Observer) नियुक्त करता है !
चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं। इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता।
सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने वाले काम के लिए नहीं होगा।
सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा।
किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा।
किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी।
किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे।
आचार संहिता कब लगती है | Duration of Code of Conduct
चुनाव की घोषणा चुनाव आयोग के द्वारा की जाती है, इसके साथ ही आचार संहिता लागू कर दी जाती और यह चुनाव के परिणाम के साथ ही समाप्त हो जाती है | चुनाव के शुरू होने से पहले यह ECI द्वारा चुनावी क्षेत्र में लगा दी जाती है |
आचार संहिता लगने से क्या होता है?
आचार संहिता का उद्देश्य पार्टियों के बीच मतभेद टालने, शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराना होता है ! इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी, केंद्रीय या राज्य की अपने आधिकारिक पदों का चुनावों में लाभ लेने हेतु गलत प्रयोग न कर सके ! इस प्रकार मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट का माध्यम से चुनाव का समापन उचित प्रकार से करा लिया जाता है !
यहाँ पर आपको आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) क्या होता है, ये कब लगती है, Rules, अवधि के विषय में जानकारी दी गयी है ! इस प्रकार की अन्य जानकारी के लिए आप पर विजिट कर सकते है ! अगर आप दी गयी जानकारी के विषय में अपने विचार या सुझाव अथवा प्रश्न पूछना चाहते है, तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से संपर्क कर सकते है !
आचार संहिता क्या है (What Is Code of Conduct) से सम्बंधित जानकारी
निर्वाचन चुनाव आयोग के द्वारा लोकसभा, विधानसभा तथा पंचायत के चुनाव से पूर्व एक नियमावली बनाई जाती है, जिसका अनुशरण राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों तथा आम नागरिको को करना होता है! लोकतंत्र में स्वतंत्रता तथा निष्पक्षता के साथ चुनाव के द्वारा नई सरकार का चयन हो सके, इसलिए चुनाव आयोग के द्वारा आचार संहिता लागू की जाती है जिसके नियमो का पालन सख्ती के साथ सभी को करना होता है !
आचार संहिता चुनाव की घोषणा के साथ ही लागू कर दी जाती है, आचार संहिता लागू करने का उद्देश्य निष्पक्षता के साथ लोकतंत्र में अच्छी छवि वाली सरकार का गठन हो सके! आप लोगो ने आचार संहिता शब्द अवश्य चुनाव के समय सुना होगा, लेकिन बहुत से लोगो को इस विषय में जानकरी नहीं होती है, आचार संहिता क्या है, इसके क्या नियम होते है तथा कैसे पालन करना होता है इसलिए आपको “आचार संहिता क्या है, नियम, Model Code of Conduct in Hindi” इसके विषय में पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गयी है !
आचार संहिता क्या है? (What is Code of Conduct)
आचार संहिता को अंग्रेजी में “Code of Conduct” (कोड ऑफ़ कंडक्ट) कहते है, चुनाव आयोग के द्वारा बनाये गए नियमो को आचार संहिता कहते है! चुनाव आयोग के द्वारा जारी किये गए निर्देशों तथा नियमो का पालन चुनाव के समय सभी राजनितिक दलों, उम्मीदवारों, नेताओ तथा आम नागरिको को करना होता है! आचार संहिता चुनाव की तिथि की घोषणा के साथ ही लागू कर दी जाती है तथा चुनाव के परिणाम आने तक लागू रहती है! मतदाताओं के द्वारा दिए गए मतों की गिनती होने के बाद यह समाप्त हो जाती है!
आचार संहिता के समय सभी प्रत्याशियों को इसका पालन करना होता है, उलंघन होने की स्थिति में चुनाव आयोग के द्वारा कड़ी कार्यवाही की जाती है, एफआईआर भी दर्ज हो सकती है, तथा जेल भी भेजा जा सकता है, दोषी होने पर चुनाव प्रक्रिया से निष्कासित भी किया जा सकता है !
आचार संहिता लागू होने के दौरान सरकार के द्वारा नई घोषणा नहीं करने पर रोक होती है, इस समय सरकार को शिलान्यास, लोकार्पण तथा भूमिपूजन की अनुमति नहीं होती है, सरकारी खजाने का उपयोग नहीं करना होता है और नहीं न ही कोई नई योजना क्रियान्वित करनी होती है! चुनाव आयोग के द्वारा चुनावी तथा राजनितिक दलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पर्वेक्षणो की नियुक्ति की जाती है, जिससे आचार संहिता के नियमो के विरुद्ध कोई भी प्रत्याशी कार्य न करेतथा गलत प्रयोजन कर के मतदाताओ से मत न प्राप्त कर सके!
आचार संहिता के सामान्य नियम (Generally Rule Code of Conduct)
चुनाव आचार संहिता के अंतर्गत लागू होने वाले नियमो की अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी को नहीं करना होता है!
सरकारी गाड़ी, बंगले या विमान का प्रयोग चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकते है!
रैली के आयोजन से पूर्व राजनेता, राजनीतिक दल या प्रत्याशी को पुलिस से अनुमति लेना होता है!
चुनावी रैली के दौरान धर्म या जाति के नाम पर मतदाताओं से मत नहीं मांगने होते है!
अन्य दलों की सभाओ तथा रैलियों में बाधा नहीं डालना होता है!
सभा के लिए स्थान, पोस्टर मांगने के लिए दीवार की पहले अनुमति ले तब प्रयोग करे!
धार्मिक स्थानों पर चुनाव के प्रचार के लिए मंच नहीं बनाना होता है!
मतदाताओं को पैसे देकर या परेशान कर के मत प्राप्त करने के लिए सहमत नहीं करना होता है!
राजनीतिक दलों तथा प्रत्याशियों से सम्बंधित नियम (Rules Related to Candidates & Political Party)
राजनीतिक दलों के द्वारा आयोजित की जाने वाली सभाओ के लिए स्थान तथा समय की सूचना पुलिस अधिकारियों को पहले से ही देना होता है !
प्रशासन के द्वारा अनुमति लेने के बाद ही उस स्थान पर सभा का आयोजन करे !
सभा के पहले ही प्रत्याशी यह सुनिश्चित कर ले की सभा के लिए चुने गए स्थान पर निषेधाज्ञा न लागू हो !
लाऊड स्पीकर या अन्य यंत्र का प्रयोग करने के लिए सभा से पूर्व प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर ले !
रैली का आयोजन यातायात में होने वाली असुविधा को ध्यान में रख कर करे !
रैली के प्रारम्भ का स्थान, मार्ग तथा समय की सूचना पूर्व में ही प्रशासन को देना चाहिए !
यदि दो राजनीतिक दलों को एक ही दिन और मार्ग से रैली निकलना हो तो पूर्व में ही बात कर ले !
मतदान के दिन का नियम (Polling Day Rules)
सभी राजनीतिक दलों तथा प्रत्याशियों को अपने कार्यकर्ताओ को पहचान पत्र देना चाहिए !
मतदान केंद के पास लगाए जाने वाले कैंप छोटे हो तथा उसमे भीड़ न लगाए !
मतदाता के अतिरिक्त जिसे चुनाव आयोग से आज्ञा न हो चुनाव केंद्र में जाने की अनुमति नहीं है !
मतदान के दिन वाहन चलाने के लिए परमिट प्राप्त करे !
मतदाताओं को सादी पर्ची वितरित करे, जिसमे प्रतीक चिह्न, दल या प्रत्याशी का नाम न अंकित हो !
सत्ताधारी दल के नियम (Ruling Party Rules)
किसी भी सरकारी दौरे को चुनाव प्रचार के लिए प्रयोग नहीं किया जायेगा!
सरकारी विमान स्थान तथा गाड़ियों का प्रयोग दल के प्रचार के लिए नहीं करना होता है !
चुनाव आयोग के द्वारा जिन सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियो को कार्य सौपा जाता है उनके अतिरिक्त अन्य कोई सभा एवं अन्य समारोह में उपस्थित नहीं हो सकते है!
विश्रामगृह या अन्य सरकारी आवासों पर केवल सत्ताधारी दल का ही एकाधिकार नहीं होगा तथा सभी प्रत्याशियों तथा दलों को निर्धारित शर्तो के अनुसार आवंटित किया जायेगा!
सरकारी धन का प्रयोग किसी भी प्रकार के प्रचार जैसे समाचार पत्रों , टीवी चैनल के द्वारा विज्ञापन में नहीं किया जायेगा !
आदर्श आचार संहिता की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
आदर्श आचार संहिता की मुख्य विशेषताएं निर्धारित करती हैं कि राजनीतिक दलों, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यथियों और सत्ताधारी दलों को निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान कैसा व्यवहार करना चाहिए अर्थात् निर्वाचन प्रक्रिया, बैठकें आयोजित करने, शोभायात्राओं, मतदान दिवस गतिविधियों तथा सत्ताधारी दल के कामकाज इत्यादि के दौरान उनका सामान्य आचरण कैसा होगा।
क्या मंत्री अपने आधिकारिक दौरे को निर्वाचन प्रचार के साथ मिला सकते हैं?
नहीं।
क्या सरकारी वाहन को निर्वाचन प्रचार संबंधी कार्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है?
विमान, वाहनों इत्यादि सहित कोई भी सरकारी वाहन किसी दल या अभ्यर्थी के हितों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रयोग नहीं किया जाएगा।
क्या सरकार निर्वाचन कार्य से संबंधित पदाधिकारियों का स्थानांतरण और तैनाती कर सकती है?
निर्वाचन के आयोजन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए सभी अधिकारियों/पदाधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती पर संपूर्ण प्रतिबंध होगा। यदि किसी अधिकारी का स्थानांतरण या तैनाती आवश्यक मानी जाती है तो आयोग की पूर्व-अनुमति ली जाएगी।
यदि निर्वाचन कार्य से संबंधित किसी अधिकारी का आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार द्वारा स्थानांतरण कर दिया जाता है और उसने नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है तो क्या ऐसा अधिकारी आचार संहिता की घोषणा के बाद नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण कर सकता है?
नहीं। यथापूर्णस्थिति बनाए रखी जाएगी।
क्या कोई केंद्रीय मंत्री या राज्य सरकार का मंत्री निर्वाचनों की अवधि के दौरान किसी आधिकारिक चर्चा के लिए किसी राज्य या निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन संबंधी अधिकारी को बुला सकता है?
कोई भी केंद्रीय या राज्य सरकार का मंत्री कहीं भी किसी आधिकारिक चर्चा हेतु राज्य या निर्वाचन क्षेत्र के किसी निर्वाचन संबंधी अधिकारी को नहीं बुला सकता है।
इसका एकमात्र अपवाद तभी होगा जब कोई मंत्री संबंधित विभाग के प्रभारी होने के नाते या कोई मुख्यमंत्री कानून एवं व्यवस्था के असफल हो जाने या प्राकृतिक आपदा या किसी आपातकाल में ऐसे किसी निर्वाचन क्षेत्र का आधिकारिक दौरा करते हैं जिसमें अधीक्षण, मदद, राहत और इसी प्रकार के विशेष प्रयोजनार्थ ऐसे मंत्री/मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति अपेक्षित होती है।
यदि कोई केंद्रीय मंत्री पूर्णत: आधिकारिक कार्य से दिल्ली से बाहर दौरा कर रहे हैं, जिसे लोकहित मे टाला नहीं जा सकता है तो उस मंत्रालय/ विभाग के संबंधित सचिव से इस आशय को प्रमाणित करने वाला एक पत्र संबंधित राज्य के मुख्य सचिव को भेजने के साथ उसकी एक प्रति निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।
क्या कोई पदाधिकारी मंत्री से उनके निजी दौरे के दौरान उस निर्वाचन क्षेत्र में मिल सकते हैं जहां निर्वाचन हो रहे हैं।
कोई पदाधिकारी जो मंत्री से निर्वाचन क्षेत्र में उनके निजी दौरे के दौरान मिलते हैं, संगत सेवा नियमों के अधीन कदाचार के दोषी होंगे और यदि वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 129(1) में उल्लिखित पदाधिकारी हैं तो उन्हें उस धारा के सांविधिक उपबंधों का उल्लंघन करने का अतिरिक्त दोषी माना जाएगा और वे उसके अधीन उपबंधित दांडिक कार्रवाई के भागी होंगे।
क्या निर्वाचनों के दौरान मंत्री आधिकारिक वाहन के हकदार होंगे?
मंत्रियों को अपना आधिकारिक वाहन केवल अपने आधिकारिक निवास से अपने कार्यालय तक शासकीय कार्यों के लिए ही मिलेगा बशर्ते इस प्रकार के सफर को किसी निर्वाचन प्रचार कार्य या राजनीतिक गतिविधि से न जोड़ा जाए।
क्या मंत्री या कोई अन्य राजनीतिक कार्यकर्ता सायरन सहित बीकन प्रकाश वाली पायलट कार का प्रयोग कर सकते हैं?
मंत्री या किसी अन्य राजनीतिक कार्यकर्ता को निर्वाचन अवधि के दौरान निजी या आधिकारिक दौरे पर किसी पायलट कार या किसी रंग की बीकन लाइट अथवा किसी भी प्रकार के सायरन सहित कार का प्रयोग करने की अनुमति नहीं होगी भले ही राज्य प्रशासन ने उसे सुरक्षा कवर दिया हो जिसमें ऐसे दौरों पर उसके साथ सशस्त्र अंगरक्षकों के उपस्थित रहने की आवश्यकता हो। यह निषेध सरकारी व निजी स्वामित्व वाले दोनों प्रकार के वाहनों पर लागू होगा।
क्या राजनीतिक कार्यकर्ताओं के निवास स्थान पर "इफ्तार पार्टी" या ऐसी ही कोई अन्य पार्टी आयोजित की जा सकती है जिसका खर्चा सरकारी कोष से किया जाएगा।
नहीं। तथापि, कोई भी व्यक्ति अपनी निजी क्षमता और अपने निजी निवास स्थान पर ऐसी पार्टी का आयोजन करने के लिए स्वतंत्र है।
क्या सत्ताधारी पार्टी की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए उपलब्धियों के संबंध में सरकारी कोष की लागत पर विज्ञापन जारी करने पर कोई प्रतिबंध है ?
हां। निर्वाचन अवधि के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सरकारी कोष की लागत पर पार्टी की उपलब्धियों के संबंध में विज्ञापन और सरकारी जन-सम्पर्क मीडिया के दुरूपयोग पर निषेध है।
क्या केंद्र में सत्ताधारी पार्टी/राज्य सरकार की उपब्धियों को प्रदर्शित करने वाले होर्डिंग/विज्ञापनों को राजकोष की लागत पर जारी रखा जा सकता है?
नहीं। प्रदर्शित किए गए इस प्रकार के सभी होर्डिंग, विज्ञापन इत्यादि संबंधित प्राधिकारियों द्वारा तुरन्त हटा दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित अन्य मीडिया पर सरकारी राजकोष के खर्चें पर कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।
मान लीजिए किसी योजना या कार्यक्रम के संबंध में कार्य आदेश जारी किया गया है। क्या इसे निर्वाचन के बाद शुरू किया जा सकता है ?
निर्वाचनों की घोषणा से पूर्व जारी कार्य आदेश के संबंध में यदि क्षेत्र में वास्तविक रूप से कार्य शुरू नहीं किया गया है तो उसे शुरू नहीं किया जाएगा। परंतु यदि काम वास्तव में शुरू कर दिया गया है तो उसे जारी रखा जा सकता है।
सरकार आपातकालिक स्थिति या अप्रत्याशित आपदाओं से निपटने के लिए क्या करती है जबकि कल्याणकारी उपायों की घोषणा पर प्रतिबंध लगा होता है ?
आपातकालिक स्थिति या अप्रत्याशित आपदाओं यथा सूखे, बाढ़, महामारी, अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने अथवा वृद्धजनों तथा निशक्त इत्यादि हेतु कल्याणकारी उपाय करने के लिए सरकार आयोग का पूर्व अनुमोदन ले सकती है तथा सरकार को आडंबरपूर्ण समारोहों से पूरी तरह से बचना चाहिए और सरकार को ऐसी कोई भी परिस्थिति उत्पन्न करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए कि सरकार द्वारा ऐसे कल्याणकारी उपाय या सहायता या पुनर्वास कार्य किसी अंतर्निहित उद्देश्य से किए जा रहे हैं।
क्या शराब के ठेकों, तेंदु की पत्तियों और ऐसे अन्य मामलों के संबंध में निविदा नीलामी इत्यादि कार्रवाई की जा सकती है ?
जी नहीं, संबंधित क्षेत्र में निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्ण होने तक ऐसे मामलों पर कार्रवाई को आस्थगित किया जा सकता है और सरकार वहां अंतरिम व्यवस्था कर सकती है जहां यह अपरिहार्य रूप से आवश्यक हो।
क्या सरकारी स्वामित्व वाली बसों की बस टिकट के पिछली ओर राजनीतिक विज्ञापन प्रकाशित किया जा सकता है।
जी नहीं।
क्या गेहूं और अन्य कृषि-संबंधी उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जा सकता है ?
इस संबंध में निर्वाचन आयोग से परामर्श लिया जा सकता है।
क्या राज्य सरकार निर्वाचन आयोग से प्रत्यक्ष रूप में किसी प्रस्ताव के संबंध में कोई स्पष्टीकरण/अनापत्ति/अनुमोदन मांग सकती है?
जी नहीं। निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण/अनापत्ति/अनुमोदन मांगने हेतु राज्य सरकार का कोई भी प्रस्ताव केवल मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से ही भेजा जाना चाहिए जो संबंधित मामले में अपनी सिफारिशें देंगे अथवा अन्यथा टिप्पणी प्रस्तुत करेंगे।
निर्वाचन प्रचार करते समय राजनीतिक दलों/अभ्यर्थियों के लिए प्रमुख दिशा-निर्देश क्या हैं?
निर्वाचन प्रचार के दौरान कोई भी अभ्यर्थी या दल ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे मौजूदा मतभेद बढ़ जाए या जिनसे परस्पर द्वेष पैदा हो अथवा भिन्न-भिन्न जातियों और समुदायों, धर्मों या भाषा-भाषी लोगों में तनाव बढ़ जाए। इसके अतिरिक्त अन्य राजनीतिक दलों की आलोचना करते समय यह केवल उनकी नीतियों और कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड और कार्यों तक ही सीमित होनी चाहिए। दलों और अभ्यर्थियों का निजी जीवन के सभी पहलुओं की आलोचना करने से बचना चाहिए, जो अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े न हों। दूसरे दलों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना निराधार आरोपों या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर नहीं की जानी चाहिए।
क्या निर्वाचन प्रचार के लिए धार्मिक स्थानों का प्रयोग करने पर कोई प्रतिबंध है?
जी हां। धार्मिक स्थान यथा मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारा या पूजा के अन्य स्थानों का निर्वाचन प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मत प्राप्त करने के लिए जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जाएगी।
क्या कोई अभ्यर्थी जुलस के साथ अपना नाम-निर्देशन पत्र भरने के लिए रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय जा सकता है ?
जी नहीं। रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय की परिधि में आने वालो वाहनों की अधिकतम संख्या को तीन तक सीमित रखा गया है और रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय में जाने वाले व्यक्तियों की अधिकतम संख्या को पांच (अभ्यर्थी सहित) तक सीमित रखा गया है।
क्या निर्वाचकीय प्रयोजनों हेतु वाहनों के चलाने पर कोई प्रतिबंध है ?
निर्वाचन प्रचार के प्रयोजनार्थ अभ्यर्थी कितने भी वाहन (टू व्हीलर सहित सभी यांत्रिकीय और मोटरयुक्त वाहन) चला सकता है पंरतु उसे ऐसे वाहन चलाने के लिए रिटर्निंग अधिकारी का पूर्व अनुमोदन लेना होता है और उसे रिटर्निंग अधिकारी द्वारा जारी परमिट की मूल प्रति (फोटोकापी नहीं) को वाहन की विंड स्क्रीन पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना चाहिए। परमिट पर वाहन की परमिट संख्या और उस अभ्यर्थी का नाम, जिसके पक्ष में वाहन जारी किया गया है, का उल्लेख होना चाहिए।
क्या किसी वाहन, जिसके लिए अभ्यर्थी के नाम पर निर्वाचन प्रचार हेतु अनुमति ली गई है, को दूसरे अभ्यर्थी द्वारा निर्वाचन प्रचार हेतु प्रयोग किया जा सकता है ?
जी नहीं। अन्य अभ्यर्थी द्वारा निर्वाचन प्रचार हेतु ऐसे वाहन के प्रयोग हेतु भारतीय दंड संहिता की धारा 171ज के अधीन कार्रवाई की जाएगी।
क्या राजनीतिक प्रचार अभियान तथा रैलियों के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उनके मैदानों (भले ही सरकारी सहायता प्राप्त, निजी या सरकारी) के प्रयोग पर प्रतिबंध है?
आयोग ने राजनीतिक प्रयोग हेतु स्कूलों और कॉलेज के मैदानों (पंजाब और हरियाणा राज्य को छोड़कर जहां पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से विशेष निषेध है) के प्रयोग की अनुमति नहीं दी है बशर्तें कि:
किसी भी परिस्थिति में स्क्ूल और कालेज के शैक्षिक कैलेण्डर को वितरित न किया जाए।
स्कूल/ कॉलेज प्रबंधन को इस प्रयोजनार्थ कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए और ऐसे प्रचार अभियान के लिए स्कूल/कॉलेज प्रबंधन तथा साथ ही सब डिवीज़नल अधिकारी से अनुमति ली जाए।
ऐसी अनुमति 'पहले आओ पहले पाओ' आधार पर दी जाती है और किसी भी राजनीतिक दल को इन मैदानों के प्रयोग पर एकाधिकार करने की अनुमति नहीं है।
किसी भी न्यायालय का ऐसा कोई आदेश/निदेश नहीं है जो ऐसे परिसर/मैदान के प्रयोग पर रोक लगाता है।
राजनैतिक बैठकों के लिए स्कूल/कॉलेज के मैदानों के आबंटन में किसी भी उल्लंघन को आयोग द्वारा गंभीरता से लिया जाएगा। इस संबंध में जिम्मेवारी सब-डिवीज़नल अधिकारी की है, और
राजनीतिक दल और अभ्यर्थी तथा निर्वाचन प्रचार करने वाले इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे कि उपर्युक्त मानदंडों का उल्लंघन न हो। यदि ऐसे मैदानों को निर्वाचन प्रचार के प्रयोजनार्थ प्रयोग किया जा रहा है तो प्रयोग के बाद इन्हें बिना किसी नुकसान के या की गई क्षति, यदि कोई हुई है, हेतु अपेक्षित क्षतिपूर्ति के साथ संबंधित प्राधिकारी को लौटाना चाहिए। कोई भी राजनीतिक दल जो संबंधित स्कूल/ कॉलेज प्राधिकारी को प्रचार अभियान वापस करते समय ऐसी क्षतिपूर्ति, यदि कोई हुई है, का भुगतान करने के जिम्मेवार होंगे।
राजनीतिक दलों/ अभ्यर्थियों द्वारा सरकारी एयरक्रॉफ्ट/हेलीकॉप्टरों (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित) को लेने के लिए कोई नियम है ?
जी हां। राजनीतिक दलों/अभ्यर्थियों के लिए सरकारी विमान/हेलीकॉप्टर या प्राइवेट कंपनियों के एयरक्रॉफ्ट/हेलीकॉप्टर को किराए पर लेने की अनुमति देते हुए निम्नलिखित शर्तों का अनुसरण किया जाना चाहिए।
सत्ताधारी दल और अन्य दल तथा निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी के बीच कोई भेद नहीं होना चाहिए।
इसका भुगतान राजनीतिक दलों या निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों द्वारा किया जाएगा और इसका उचित रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सभी के लिए दरें और निबंधन व शर्तें एक समान होंगी।
वास्तविक आबंटन 'पहले आओ पहले पाओ' आधार पर होना चाहिए। इस प्रयोजनार्थ आवेदन की तारीख व समय को आवेदन प्राप्त करने वाले प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा नोट कर लेना चाहिए।
ऐसे मामलों में जब कभी दो या उससे अधिक आवेदनों की तारीख व समय एक होगा तो आबंटन का निर्णय ड्रॉ द्वारा होगा।
किसी भी व्यक्ति, फर्म, पार्टी या अभ्यर्थी को एक ही समय पर तीन दिन से अधिक के लिए एयरक्रॉफ्ट/हेलीकॉप्टर किराए पर लेने की अनुमति नहीं होगी।
क्या पैम्फलेट, पोस्टर आदि की छपाई पर कोई प्रतिबंध है?
अभ्यर्थी किसी ऐसे निर्वाचन पैम्पलेट अथवा पोस्टर का मुद्रण अथवा प्रकाशन नहीं करेगा अथवा उसका मुद्रण अथवा प्रकाशन नहीं करवाएगा, जिस पर उसका चेहरा, नाम अथवा पते मुद्रित अथवा प्रकाशित नहीं होते हों।
क्या सिनेमैटोग्राफ, टेलीविजन या इसी तरह के अन्य उपकरणों के माध्यम से जनता को किसी भी निर्वाचन सामग्री का प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध है?
अभ्यर्थी निर्वाचन के समापन के लिए तय किए गए समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटे की अवधि के दौरान, सिनेमैटोग्राफ, टेलीविजन या अन्य इसी तरह के उपकरण के माध्यम से जनता को किसी भी निर्वाचन सामग्री अथवा प्रचार को प्रदर्शित नहीं कर सकते हैं।
क्या पार्टी या अभ्यर्थी द्वारा अस्थायी कार्यालयों की स्थापना और संचालन के लिए शर्तें/दिशानिर्देश हैं?
ऐसे कार्यालय किसी भी अतिक्रमण के माध्यम से सार्वजनिक या निजी संपत्ति/किसी भी धार्मिक स्थानों पर, अथवा ऐसे धार्मिक स्थानों के परिसर/किसी भी शैक्षणिक संस्थान/अस्पताल के समीप, किसी मौजूदा मतदान केंद्र के 200 मीटर के भीतर नहीं खोले जा सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे कार्यालय पार्टी का केवल एक झण्डा और बैनर को पार्टी प्रतीक/तस्वीरों के साथ प्रदर्शित कर सकते हैं, और ऐसे कार्यालयों में उपयोग किए जाने वाले बैनर का आकार इस अतिरिक्त शर्त के अध्यधीन 4 फीट X 8 फीट से अधिक नहीं होना चाहिए कि यदि स्थानीय विधियों द्वारा बैनर/होर्डिंग इत्यादि के लिए अधिक छोटे आकार का निर्धारण किया जाएगा तो स्थानीय विधि द्वारा निर्धारित छोटे आकार का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या जनसभा आयोजित करने या जुलूस निकालने पर कोई प्रतिबंध है?
किसी भी सार्वजनिक या निजी स्थान पर सभा आयोजित करने और जुलूस निकालने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों से पूर्व लिखित अनुमति लेनी चाहिए।
क्या लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने के लिए कोई समय-सीमा है?
रात 10.00 बजे से प्रात: 6.00 बजे के बीच लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
वह कौन सी अंतिम समय-सीमा है जिसके बाद कोई जनसभा और जुलूस नहीं निकाला जा सकता है?
जन सभाएं सुबह 6.00 बजे से पहले और शाम 10 बजे के बाद आयोजित नहीं की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थी मतदान के समापन के लिए निर्धारित समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटे की अवधि के दौरान जनसभाएं और जुलूस नहीं निकाल सकते। मान लीजिए, मतदान का दिन 15 जुलाई है और मतदान का समय सुबह 8 बजे से शाम 5.00 बजे तक है, तो जन सभा और जुलूस 13 जुलाई को शाम 5.00 बजे से बंद हो जाएंगे।
क्या ओपिनियन पोल या एक्जिट पोल किसी भी समय आयोजित, प्रकाशित, प्रचारित या प्रसारित किए जा सकते हैं?
किसी भी तरह से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, या किसी अन्य मीडिया द्वारा किसी भी जनमत सर्वेक्षण या एक्जिट पोल के परिणाम को प्रकाशित, प्रचारित या प्रसारित नहीं किया जाएगा, जो निम्नलिखित अवधि के लिए मान्य होंगे:
एक ही चरण में आयोजित निर्वाचन में मतदान समापन के निर्धारित घंटे के साथ समाप्त हो रही 48 घंटों की अवधि के दौरान; तथा
एक बहु स्तरीय निर्वाचन में, और विभिन्न राज्यों में एक साथ निर्वाचनों की घोषणा के मामले में, निर्वाचन के प्रथम चरण के मतदान के लिए निर्धारित अवधि के आरंभ होने से 48 घंटे आरंभ होने की अवधि के दौरान और सभी राज्यों में सभी चरणों के मतदान समाप्त हो जाने तक।
क्या मतदान केंद्र में या उसके आस-पास प्रचार पर कोई प्रतिबंध है?
मतदान के दिन मतदान केंद्र के एक सौ मीटर की दूरी के भीतर वोटों के लिए प्रचार करना निषिद्ध है।
क्या मतदान केंद्र या उसके पास सशस्त्र जाने पर कोई प्रतिबंध है?
मतदान के दिन मतदान केंद्र के आस-पास शस्त्र अधिनियम 1959 में परिभाषित किए गए किसी भी तरह के हथियारों से लैस किसी भी व्यक्ति को हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है।
मतदान के दिन एक अभ्यर्थी कितने वाहनों के लिए हकदार है?
राज्य विधान सभा के निर्वाचन के लिए, अभ्यर्थी हकदार होगा:
अभ्यर्थी के स्वयं के उपयोग के लिए एक वाहन
अभ्यर्थी के निर्वाचन अभिकर्ता के उपयोग के लिए एक वाहन
इसके अलावा, अभ्यर्थी के कार्यकर्ताओं या पार्टी कार्यकर्ताओं के उपयोग के लिए एक वाहन।


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